भारत ने 'विश्वशक्ति' नहीं, 'विश्वगुरु' बनने का मार्ग चुना...
आज बेंगलुरु में परम पूज्य, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी के साथ आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित 'आर्ट ऑफ लिविंग वैश्विक सम्मेलन' में सहभागिता की। वसुधैव कुटुम्बकम्' हमारी संस्कृति का मूल है। हमने हमेशा विश्व कल्याण की कामना की है। जब मन शांत होता है, तभी शरीर संतुलन, स्वास्थ्य और सामंजस्य में रहता है। यही आर्ट ऑफ लिविंग है। इस अवसर पर तेलंगाना के माननीय राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ल जी और माननीय केंद्रीय मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी जी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।