कृषि समृद्धि से सांस्कृतिक विकास तक—विजनरी भारत की दिशा

किसानों के जीवन को सशक्त बनाने और उनकी समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में ‘कृषि वर्ष’ का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा। कोदो-कुटकी जैसे पारंपरिक मोटे अनाजों को प्रोत्साहन, बोनस वितरण, किसान रथों के माध्यम से निरंतर संवाद, जैविक खेती का विस्तार और दलहनी-तिलहनी फसलों के उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि—ये सभी प्रयास किसान-केंद्रित विकास की आधारशिला हैं। आकांक्षी जिलों में योजनाओं की पहुँच बढ़ाकर अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित किया जाएगा, साथ ही कृषि आधारित उद्योगों को गति देकर स्थानीय रोजगार सृजन पर विशेष बल रहेगा। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ रण ऑफ कच्छ का ‘रण उत्सव’ आज भारत की सांस्कृतिक शक्ति और पर्यटन क्षमता का वैश्विक प्रतीक है। यह उदाहरण दर्शाता है कि दूरदर्शी सोच और जनभागीदारी से बंजर भूमि भी आजीविका, पर्यटन और विकास का जीवंत मॉडल बन सकती है। लोक कलाओं की समृद्ध प्रस्तुतियाँ और विश्वस्तरीय व्यवस्थाएँ इसकी विशिष्ट पहचान हैं। इसी प्रेरणा से भविष्य में सिंहस्थ जैसे महाआयोजनों के लिए टेंट सिटी की अवधारणा को सुदृढ़ किया जाएगा तथा पर्यटन क्षमता वाले क्षेत्रों में ऐसी योजनाएँ विकसित होंगी—जिससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और किसान भी लाभान्वित होंगे। भुज का ‘स्मृति वन’ संवेदना और संकल्प का प्रतीक है। इसी भावना के साथ औद्योगिक त्रासदियों की स्मृति को सहेजने और सीख को संजोने के लिए समर्पित संग्रहालयों की परिकल्पना मानवीय दृष्टि और उत्तरदायित्व को दर्शाती है। निश्चय ही, यह समग्र दृष्टिकोण—कृषि, संस्कृति, पर्यटन और संवेदना का संगम—नए भारत की सशक्त पहचान को निरंतर मजबूत करता है।
Facebook twitter Twitter Instagram YouTube